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भिण्ड (लहार):
मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले के लहार तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत असनेहट से विकास के दावों की पोल खोलने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ के ग्राम खुर्द में स्थित लगभग 500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक ‘सागर सरकार मंदिर’ और प्राचीन बावड़ी तक पहुँचने के लिए आज भी श्रद्धालुओं के पास कोई पक्का रास्ता नहीं है। प्रशासनिक अनदेखी और लाचारी से तंग आकर अब ग्रामीणों ने खुद ही चंदा इकट्ठा कर सड़क निर्माण का बीड़ा उठा लिया है।
बंजारों ने कराया था ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण, हज़ारों लोगों की जुड़ी है आस्था
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस पावन धाम का इतिहास सदियों पुराना है। बताया जाता है कि लगभग 500 साल पहले बंजारों के एक समूह द्वारा इस भव्य मंदिर और उसके समीप एक सुंदर प्राचीन बावड़ी का निर्माण कराया गया था। इस क्षेत्र से हज़ारों-लाखों श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। हर त्योहार और विशेष अवसरों पर यहाँ बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुँचते हैं, लेकिन मंदिर तक जाने का सुगम मार्ग न होने के कारण वृद्धों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नेताओं के वादे खोखले, जनता ने खुद जुटाया चंदा
चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे और विकास की बातें करने वाले जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी इस सुदूर अंचल की सुध लेना भूल गए हैं। जब ग्रामीणों की शिकायतों पर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो ग्राम खुर्द की जनता ने आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। ग्रामीणों ने आपस में चंदा जमा किया और भगवान के द्वार तक जाने वाले रास्ते को दुरुस्त करने का काम स्वयं के खर्च पर शुरू कर दिया है।
प्रशासन की लाचारी पर जनता में भारी आक्रोश
हमारे संवाददाता द्वारा ग्राउंड जीरो से दिखाई गई सीधी तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता को स्वयं संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ 500 साल पुराने इस आस्था के केंद्र को एक सड़क तक नसीब नहीं हो सकी है। प्रशासन की इस बेरुखी को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
रिपोर्ट मध्यप्रदेश स्टेड हेड विवेक पाण्डेय




