Zee Bharat news 24Zee Bharat news 24Zee Bharat news 24
  • होम
  • देश
  • विदेश
  • मध्यप्रदेश
  • क्राइम
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • लाइफस्टाइल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • धार्मिक
Notification Show More
Font ResizerAa
Font ResizerAa
Zee Bharat news 24Zee Bharat news 24
  • होम
  • देश
  • विदेश
  • मध्यप्रदेश
  • क्राइम
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • लाइफस्टाइल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • धार्मिक
  • होम
  • देश
  • विदेश
  • मध्यप्रदेश
  • क्राइम
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • लाइफस्टाइल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • धार्मिक
Follow US
Home » आधुनिकता की चकाचौंध में दम तोड़ती कुम्हारों की कला
Uncategorizedउत्तरप्रदेश

आधुनिकता की चकाचौंध में दम तोड़ती कुम्हारों की कला

Zee Bharat News 24
Last updated: February 5, 2026 8:02 am
Zee Bharat News 24
3 Min Read

जी भारत न्यूज24 

बांगरमऊ,उन्नाव।

कभी गांव की सुबह चाक की चरमराहट और गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ शुरू होती थी। हाथ की कलाकारी और चाक की गति जब मिलती थी, तो मिट्टी के बेजान ढेले सुंदर घड़ों, दीयों और सुराहियों में बदल जाते थे। लेकिन आज, यह प्राचीन कला और इसे जीवित रखने वाले कुम्हार (प्रजापति समुदाय) अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं।  बाजार में प्लास्टिक की बोतलों, चाइनीज लाइटों और स्टील के बर्तनों की भरमार ने मिट्टी के बर्तनों की मांग को लगभग खत्म कर दिया है। फ्रिज के आने से अब मिट्टी के घड़ों का पानी अपनी शीतलता खो चुका है। दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर भी अब पारंपरिक दीयों की जगह बिजली की लड़ियों ने ले ली है। कुम्हारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्ची मिट्टी की उपलब्धता है। शहरीकरण के कारण तालाब भरे जा रहे हैं और जमीनें कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रही हैं। जो मिट्टी पहले मुफ्त या कम दाम पर मिल जाती थी, उसके लिए अब मोटी रकम चुकानी पड़ती है। साथ ही, बर्तनों को पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी और ईंधन के दाम भी आसमान छू रहे हैं। कड़ी मेहनत और कम मुनाफे के कारण कुम्हारों की नई पीढ़ी इस पुश्तैनी काम को छोड़ने को मजबूर है। एक बुजुर्ग कहते हैं, “दिन भर चाक चलाने के बाद भी इतनी कमाई नहीं होती कि परिवार का पेट भर सके। मेरा बेटा अब शहर में मजदूरी करता है क्योंकि उसे इस कला में कोई भविष्य नहीं दिखता।” जानकारों का मानना है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाना और पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। मिट्टी के बर्तन भोजन के एसिडिक तत्व को संतुलित करते हैं और पोषक तत्वों को सुरक्षित रखते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी ये पूरी तरह से इको-फ्रेंडली हैं।

इस मरती हुई कला को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार और समाज दोनों को आगे आना होगा। कुम्हारों को कम ब्याज पर ऋण और आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक उपलब्ध कराना। मेलों और प्रदर्शनी के माध्यम से इन कलाकारों को सीधा बाजार उपलब्ध कराना। टेराकोटा और सजावटी बर्तनों के रूप में इस कला को आधुनिक घरों का हिस्सा बनाना। मिट्टी की यह कला केवल एक पेशा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है। यदि हमने समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियां ‘चाक’ और ‘मिट्टी के बर्तन’ केवल संग्रहालयों में ही देख पाएंगी।

Zee Bharat News 24
        
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
WhatsApp Image 2026-05-02 at 1.29.56 PM (1)
WhatsApp Image 2026-05-02 at 1.29.56 PM
WhatsApp Image 2026-05-02 at 1.29.57 PM
previous arrow
next arrow

लाइव क्रिकेट स्कोर

Live Cricket Scores

You Might Also Like

Uncategorizedउत्तरप्रदेश

मियाँगंज प्रधान व सचिव एवं पत्रकारों को किया गया सम्मानित

January 6, 2026
Uncategorizedप्रसाशनलोकल

पैन इंडिया अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत विलाव में हुआ पर्यावरण विधिक साक्षरता कार्यक्रम

December 31, 2025
उत्तरप्रदेश

उन्नाव को मिलेगी नई प्रशासनिक पहचान: जिला पंचायत के नए कार्यालय का हुआ भूमिपूजन

May 2, 2026
Uncategorizedप्रसाशनमध्यप्रदेशलोकल

कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत ने सेल्फी प्वॉइंट से मतदाता जागरूकता का संदेश दिया

March 28, 2024
Zee Bharat news 24Zee Bharat news 24
Follow US

© Copyright All Right Reserved. Zee Bharat News 24 | Hosted by Webmitr

  • Home
  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • News Source
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?