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भिंड | 28 अप्रैल, 2026 ब्यूरो रिपोर्ट: भिंड डेस्क
भिंड (मध्य प्रदेश)। नेशनल हाईवे-719 (ग्वालियर-भिंड-यूपी बॉर्डर) को फोरलेन में बदलने का सपना एक बार फिर फाइलों में दबता नजर आ रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने मार्च महीने में जो लिखित आश्वासन भिंड कलेक्टर को दिया था, उसकी समय सीमा अब टूटती दिख रही है। दिल्ली में DPR (Detailed Project Report) को मंजूरी न मिलने के कारण 30 अप्रैल तक टेंडर प्रक्रिया शुरू होना अब नामुमकिन नजर आ रहा है।
लिखित आश्वासन के बाद भी मुकर गए अफसर
बता दें कि 14 मार्च 2026 को NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने भिंड कलेक्टर को पत्र लिखकर आश्वस्त किया था कि ग्वालियर-भिंड सेक्शन (108 किमी) के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पत्र के अनुसार:
30 मार्च 2026: DPR जमा करने की अंतिम तिथि थी।
30 अप्रैल 2026: टेंडर आमंत्रित करने की तिथि तय थी।
31 अक्टूबर 2026: प्रोजेक्ट अवार्ड करने का लक्ष्य था।
28 फरवरी 2027: काम शुरू करने की डेडलाइन थी।
लेकिन हकीकत यह है कि फिलहाल DPR दिल्ली मुख्यालय में अटकी हुई है और उसे कैबिनेट से मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में टेंडर का काम तय समय पर होना संभव नहीं दिख रहा।
खूनी हाईवे: इस साल अब तक 26 की मौत, 5 साल में 341 बलि
हाईवे के निर्माण में हो रही देरी की भारी कीमत आम जनता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। टू-लेन होने की वजह से यह हाईवे ‘खूनी मार्ग’ बन चुका है।
2026 (अब तक): सड़क हादसों में 26 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
पिछले 5 साल का खौफनाक आंकड़ा: इस हाईवे ने 341 से अधिक लोगों की बलि ली है।
आंकड़े: अकेले 2022 में 67, 2023 में 67 और 2024 में 84 मौतें हुई थीं।
गडकरी के भरोसे पर भी फिरा पानी?
भिंड-दतिया सांसद संध्या राय ने मार्च माह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। मंत्री ने अफसरों को अप्रैल के पहले सप्ताह में कैबिनेट से अप्रूवल कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन मंत्रालय और तकनीकी विंग के बीच समन्वय की कमी के कारण मामला अब भी लटका हुआ है।
टोल वसूली पर भारी आक्रोश, संतों का प्रदर्शन
प्रोजेक्ट में देरी और लगातार हो रहे हादसों को लेकर जनता में भारी गुस्सा है। हाल ही में बरेठा टोल प्लाजा पर संतों के नेतृत्व में 5 घंटे तक जोरदार प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब सड़क संकरी और खतरनाक है, तो टोल वसूली क्यों की जा रही है? बरेठा और बरही टोल का अनुबंध 2025 में समाप्त होना था, जिसे सरकार ने मार्च 2028 तक बढ़ा दिया है। जनता अब इस टोल वसूली को तत्काल बंद करने की मांग कर रही है।
अधिकारियों का पक्ष:
“DPR हमारे यहाँ से दिल्ली भेजी जा चुकी है। इसकी स्वीकृति कैबिनेट से होनी है। कैबिनेट से अप्रूवल मिलने के बाद ही टेंडर और आगे की कार्यवाही दिल्ली से की जाएगी।” > — कृष्णपाल धाकड़, मैनेजर (टेक्निकल), NHAI ग्वालियर
निष्कर्ष: NH-719 का निर्माण अब केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि भिंड की जनता की जान बचाने का सवाल बन गया है। अब देखना यह है कि क्या दिल्ली की सरकार सोई हुई फाइलों को जगाती है या भिंड की जनता को और अधिक ‘शहादत’ देनी होगी।
“भास्कर के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक…”।




