जी भारत न्यूज24
भिण्ड। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के कई इलाकों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। भिण्ड जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों में कल अचानक मौसम ने करवट ली, जिसके बाद तेज धूलभरी आंधी के साथ मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि (ओले गिरना) शुरू हो गई। इस बेमौसम आफत ने जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत दी है, वहीं क्षेत्र के अन्नदाताओं के लिए यह आफत बनकर टूटी है।
तेज हवाओं के साथ गिरे ओले, सड़कों पर बिछी सफेद चादर
दोपहर के बाद अचानक आसमान में घने काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया। जिले के लहार तहसील सहित कई ग्रामीण इलाकों में मूसलाधार बारिश के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई। खेतों और सड़कों पर ओलों की सफेद चादर नजर आने लगी। कई जगहों पर ओलों का आकार काफी बड़ा था, जिससे राहगीरों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
फसलों को भारी नुकसान, खून के आंसू रोने को मजबूर किसान
यह समय रबी की फसलों की कटाई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने का है। ऐसे नाजुक समय में हुई इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं, चना और सरसों की बची हुई खड़ी और कटी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
खेतों में कटी रखी फसलें पानी में भीग गईं।
ओले गिरने से दाने झड़ गए, जिससे फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी महीनों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
मौसम विभाग ने जारी की थी चेतावनी
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय हुए ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण हवाओं के रुख में यह बदलाव आया है। मौसम विभाग ने पहले ही मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल संभाग सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया था।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
अचानक हुए इस नुकसान के बाद जिले के प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द फसलों का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है ताकि उन्हें इस आर्थिक संकट से उबारा जा सके।




