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उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में बहुत ही भ्रष्टाचारी व्याप्त है छोटे से छोटे या बड़े ट्रांसफर में अंधाधुंध पैसा चल रहा है, मेरे संज्ञान में आया सीएमओ एक एनम का ट्रांसफर करने में लाख रुपए लेते हैं, तथा हेल्थ मिनिस्टर के द्वारा डॉक्टर के ट्रांसफर करने और रूक्माने में लाखों लगते हैं,यह स्थिति चल रही है मैंने कई बार लिखा है उत्तर प्रदेश के मुखिया जी स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग पर नजर रखें, एक दो डॉक्टर कि मैने शिकायत की मेरे संज्ञान में उनकी कार्यशैली पर मैंने डिप्टी सीएम स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के ओएसडी से बात की एक बार नहीं कई बार बात करने के बाद मैं पुनः एक बार बात करनी चाही और बात हुई मैंने कहा सर डॉक्टरों की कार्यशैली के संबंध में मैंने एक पत्र आपको प्रेषित किया था, आपके द्वारा वार्ता होने के बाद उसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई कौन सा लेटर उन्होंने बोला मैं 10 या 12 बार उनके व्हाट्सएप पर लेटर डाल चुका जब बात करूं तो पत्र दुबारा दो फिर मैंने कहा कितनी बार पत्र आपको दे चुके हैं, ओएसडी साहब ने कहा मेरे पास बहुत से पत्र आते हैं, कहां-कहां तक किसका ध्यान रखें, मतलब साफ है कि पूरे उत्तर प्रदेश की शिकायतें आती होगी उसको यह लोग नजअंदाज कर देते हैं, यही कहकर सबको कि हम किस-किस पत्र का ध्यान रखें कोई काम नहीं होना है किसी का इस भाषा शैली का ब्रह्मास्त्र छोड़ देते हैं कामना करने हेतु ,सिर्फ वही शिकायतों को सुना जाता जो पहुंच वाले होते हैं,जिसमें उन्हें लगता है की कार्रवाई होगी नहीं तो वर्चस्व वाले लोग हैं हमारी शिकायत मुख्यमंत्री तक कर देंगे उस स्थिति में एक आद एप्लीकेशन को देख लेते हैं, नहीं तो कोई भी सुनवाई नहीं होती है और भ्रष्टाचारी चरम पर है, पूर्व सरकारों में विपक्ष के लोगों की पार्टी में यह हुआ करते थे, जब वह है पूर्व पार्टियों में थे वहां भी भ्रष्टाचारी पार्टियां भ्रष्टाचारियों से लिप्त रही ,उनके ऊपर आए से अधिक अधिक संपति का मामला चल रहा है, वह आज बीजेपी बीजेपी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं किस मानसिकता से किया मुझे यह नहीं जानकारी है, परंतु यह कह सकता हूं अगर बीजेपी भ्रष्टाचारियों के लिए लड़ाई लड़ रही है, तो ऐसे पदों पर पूर्व में रहे भ्रष्ट लोग को स्थान एक महत्वपूर्ण मंत्री पद ऊंचा नहीं देना चाहिए।
देवेश प्रताप सिंह राठौर,ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




