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अटेर/भिण्ड। मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं और भर्तियों में पारदर्शिता के दावों की पोल भिण्ड जिले के अटेर अनुविभाग में खुलती नजर आ रही है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र पोखर (कनेरा) में सहायिका पद की भर्ती में फर्जी दस्तावेज और कूटरचित बीपीएल कार्ड लगाने का एक गंभीर मामला सामने आया था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस मामले की लिखित शिकायत और पुख्ता सबूत अधिकारियों को सौंपे जाने के 3 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कछुआ चाल से चल रही जांच अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम देवी सिंह का पुरा (कनेरा) निवासी पूजा गुर्जर ने 15 दिसंबर 2025 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अटेर के समक्ष एक शिकायती आवेदन दर्ज कराया था। आवेदन में बताया गया था कि आंगनबाड़ी केंद्र पोखर में सहायिका पद के लिए चयनित उम्मीदवार शिवानी शर्मा (पत्नी सत्यव्रत शर्मा) ने फर्जी बीपीएल राशन कार्ड के जरिए अंक हासिल कर मेरिट सूची में प्रथम स्थान पाया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त उम्मीदवार का परिवार पूरी तरह से सक्षम वर्ग की श्रेणी में आता है। उनके पास चार पहिया, दो पहिया वाहन, पक्का मकान और अन्य संपत्तियां मौजूद हैं, जिसके चलते वे बीपीएल कार्ड बनवाने हेतु पूर्ण रूप से अपात्र हैं।
पूर्व में भी अयोग्य घोषित हो चुकी हैं उम्मीदवार
शिकायत में यह भी खुलासा किया गया है कि पूर्व में भी इसी उम्मीदवार द्वारा फर्जी दस्तावेज लगाने के संबंध में प्रकरण चला था, जिसमें वरिष्ठता सूची में आने के बाद भी फर्जी दस्तावेज होने की वजह से इन्हें अयोग्य घोषित किया गया था। इसके बावजूद इस बार पुनः कूटनीतिक तरीके से बीपीएल कार्ड के 5 अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया गया।
दिसंबर से मार्च आ गया, आखिर कब होगी कार्रवाई?
शिकायतकर्ता ने 13 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराई थी और 17 दिसंबर 2025 को एसडीएम कार्यालय में पावती भी ली थी। लेकिन आज 3 महीने बाद भी इस पूरे मामले में प्रशासन मौन साधे बैठा है।
अपात्रों को मिल रहे इस कथित मूक संरक्षण से क्षेत्र के पात्र उम्मीदवारों में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर भ्रष्टाचार की इस फाइल को ऐसे ही दबा दिया जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट




