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झाँसी (उत्तर प्रदेश) | रिपोर्टर: देवेश प्रताप सिंह राठौर
झाँसी। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में चिकित्सा के क्षेत्र में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। झाँसी के प्रसिद्ध नर्सिंग होम ‘निर्मल हॉस्पिटल’ ने अपनी सुविधाओं का विस्तार करते हुए बच्चों के लिए एक विशेष चाइल्ड केयर वार्ड (NICU) का उद्घाटन किया है। यह कदम क्षेत्र के उन नवजातों के लिए जीवनदायी सिद्ध होगा जिन्हें जन्म के समय विशेष चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता होती है।
आधुनिक उपकरणों से लैस है नई यूनिट
अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर और महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. डी. एन. मिश्रा एवं डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा ने जानकारी दी कि अक्सर कई बच्चे समय से पूर्व (Premature Birth) पैदा हो जाते हैं। ऐसे शिशुओं को बचाने के लिए लाइफ सपोर्ट और आधुनिक मशीनों की जरूरत होती है। निर्मल हॉस्पिटल में अब ऐसी अत्याधुनिक मशीनों की व्यवस्था की गई है, जिससे बच्चों का समुचित और सुरक्षित इलाज एक ही छत के नीचे संभव हो सकेगा।
एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं
निर्मल हॉस्पिटल पिछले लंबे समय से मरीजों के विश्वास का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में अस्पताल में डायलिसिस यूनिट, सीटी स्कैन और विभिन्न विभागों के लिए अलग-अलग वार्डों की शुरुआत की गई थी। अब चाइल्ड केयर वार्ड के जुड़ने से यह अस्पताल बुंदेलखंड का एक पूर्ण चिकित्सा केंद्र बन गया है।
“आज के आर्थिक युग में जहां चिकित्सा एक व्यापार बनती जा रही है, निर्मल हॉस्पिटल ‘मानवता सर्वोपरि’ के सिद्धांत पर काम कर रहा है। यहाँ अर्थ (पैसा) गौण है और मरीज का स्वास्थ्य प्राथमिक है।”
आम आदमी का अस्पताल: आयुष्मान भारत और रियायती दरें
निर्मल हॉस्पिटल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता और किफायती इलाज है। अस्पताल की मुख्य विशेषताएं निम्न हैं:
आयुष्मान भारत योजना: भारत सरकार की आयुष्मान योजना के तहत यहाँ पात्र मरीजों का निःशुल्क इलाज किया जाता है।
किफायती दरें: सामान्य मरीजों के लिए भी यहाँ बेहद रियायती दरों पर उपचार उपलब्ध है।
24×7 सेवा: अनुभवी डॉक्टरों की टीम और कुशल स्टाफ 24 घंटे मरीजों की सेवा में तत्पर रहता है।
समर्पित भाव: अपनी ईमानदारी और बेहतर इलाज के कारण ही बुंदेलखंड में इस अस्पताल ने एक बड़ा नाम कमाया है।
बुंदेलखंड के लिए बड़ी उपलब्धि
झाँसी और आसपास के जिलों के लोगों के लिए यह नई सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है। अब गंभीर स्थिति वाले बच्चों के इलाज के लिए परिजनों को बड़े महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। स्थानीय निवासियों ने अस्पताल प्रबंधन के इस प्रयास की सराहना की है और इसे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
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