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बांगरमऊ (उन्नाव): उत्तर प्रदेश समेत पूरा बांगरमऊ क्षेत्र इन दिनों भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और झुलसाने वाली लू की चपेट में है। सूर्यदेव के रौद्र रूप और आसमान से बरसती आग ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात यह हैं कि दोपहर होते-होते सड़कें पूरी तरह सूनी हो जा रही हैं और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
44 डिग्री के पार पहुंचा पारा, रिकॉर्डतोड़ गर्मी से रातें भी गर्म
बांगरमऊ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तापमान लगातार 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया जा रहा है। सुबह 8 बजे से ही तीखी धूप अपना असर दिखाना शुरू कर देती है और दोपहर 11 बजते-बजते गर्म हवाओं (लू) के थपेड़े राहगीरों को झुलसाने लगते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बार की गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रात के समय भी गर्म हवाएं चलने से लोगों को उमस और तपिश से राहत नहीं मिल पा रही है।
अघोषित बिजली कटौती ने आग में घी डालने का काम किया
भीषण गर्मी के इस मौसम में बांगरमऊ कस्बे और ग्रामीण इलाकों में हो रही अघोषित बिजली कटौती ने जनता की मुसीबत को दोगुना कर दिया है। रात के समय घंटों बिजली गायब रहने से लोग छतों और आंगनों में टहलकर रात काटने को मजबूर हैं। नींद पूरी न होने के कारण बच्चे और बुजुर्ग इस दोहरी मार से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
बाजारों में पसरा सन्नाटा, व्यापार पड़ा मंदा
गर्मी का सबसे बड़ा असर बांगरमऊ के मुख्य बाजारों में देखने को मिल रहा है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाजारों में पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है। हालांकि, फल विक्रेता, गन्ने के जूस और शिकंजी के ठेलों पर थोड़ी-बहुत भीड़ देखी जा रही है, लेकिन आम व्यापार पूरी तरह से मंदा पड़ गया है।
अस्पतालों में बढ़े मरीज: CHC अधीक्षक डॉ. मुकेश कुमार ने जारी की गाइडलाइन
भीषण गर्मी के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बांगरमऊ में इन दिनों उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन, तेज बुखार और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के मरीजों की बाढ़ आ गई है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश कुमार ने क्षेत्रीय जनता को सुरक्षित रहने के लिए ये सलाह दी है:
बहुत जरूरी होने पर ही दोपहर के समय घरों से बाहर निकलें।
बाहर निकलते समय सिर और कान को सूती कपड़े या गमछे से अच्छी तरह ढककर रखें।
शरीर में पानी की कमी न होने दें; अधिक से अधिक पानी, ORS घोल, नींबू पानी और मट्ठे का सेवन करें।
गर्मियों में होने वाले संक्रमण से बचने के लिए बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करें।
मूक पशु-पक्षियों पर भी आफत, तालाब और पोखर सूखे
इस भीषण तपिश का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि मूक पशु-पक्षियों पर भी साफ देखा जा सकता है। क्षेत्र के अधिकांश तालाब और पोखर सूख चुके हैं, जिससे आवारा पशु और पंछी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। स्थानीय समाजसेवियों ने आम जनता से अपील की है कि वे इंसानियत के नाते अपनी छतों और द्वारों पर पशु-पक्षियों के लिए पानी के सकोरे (बर्तन) अवश्य रखें।




