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मथुरा। आज पूरे भव्य और ऐतिहासिक अंदाज में जारी है। उनके आगमन को लेकर मथुरा-वृन्दावन क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं और पूरा इलाका छावनी में तब्दील दिखाई दे रहा है।
सबसे पहले पहुंचे बिहारी जी के दरबार में
सुबह मथुरा पहुंचने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का काफिला सीधे वृन्दावन पहुंचा। यहां उन्होंने सबसे पहले ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन ने उनके लिए विशेष पूजा-अर्चना की व्यवस्था की थी। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के बीच राष्ट्रपति ने ठाकुर जी की आराधना कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
निधिवन में किया पूजन
बिहारी जी के दर्शन के बाद महामहिम निधिवन पहुंचीं। यहां उन्होंने पूजन-अर्चन कर ब्रजभूमि की दिव्यता और अध्यात्म को आत्मसात किया। निधिवन में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर संतों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
सुदामा कुटी में संतों से संवाद
निधिवन दर्शन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुदामा कुटी पहुंचीं। यहां उन्होंने संतों से आध्यात्मिक चर्चा की। संतों ने उन्हें ब्रज संस्कृति, अध्यात्म और भक्ति परंपरा की महिमा से अवगत कराया। राष्ट्रपति ने भी संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया और ब्रजभूमि की आध्यात्मिकता की सराहना की।
होटल के लिए हुईं रवाना
सुदामा कुटी से निकलने के बाद राष्ट्रपति अपने विश्राम हेतु होटल रवाना हुईं। थोड़े विश्राम के बाद उनका कार्यक्रम मथुरा शहर में निर्धारित है।
अब मथुरा के प्रमुख स्थलों का करेंगी दर्शन
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू थोड़ी ही देर में मथुरा शहर पहुंचेंगी, जहां वे श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में दर्शन करेंगी। इसके बाद उनका कार्यक्रम कुब्जा कृष्ण मंदिर जाने का है, जिसे हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
• राष्ट्रपति के आगमन पर मथुरा-वृन्दावन पूरी तरह छावनी में तब्दील।
• पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद।
• ड्रोन कैमरों से निगरानी, भारी पुलिस बल और पैरा मिलिट्री की तैनाती।
• श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने के लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू।
ब्रजवासियों का उत्साह
राष्ट्रपति को अपने बीच पाकर ब्रजवासी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। जगह-जगह श्रद्धालु हाथ जोड़कर उनका स्वागत कर रहे हैं और ‘राधे-राधे’, ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
राष्ट्रपति का यह दौरा न केवल ब्रज की आस्था और अध्यात्म से जुड़ा है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने वाला भी साबित होगा।
वृन्दावन संवददाता आनंद पचौरी




