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बांगरमऊ,उन्नाव। रसोई गैस के दामों में लगातार हो रही वृद्धि ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफे के कारण उपभोक्ताओं, विशेषकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों में भारी रोष व्याप्त है। रसोई का बजट बिगड़ने से अब लोगों के सामने ‘महंगाई की मार’ एक बड़ी चुनौती बन गई है।
गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों को लेकर हर तरफ चर्चा है। महिलाओं का कहना है कि एक तरफ खाद्य पदार्थों और सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने “कोढ़ में खाज” का काम किया है।
कस्बे की एक गृहणी, श्रीमती विमला देवी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “पहले गैस सस्ती थी तो खाना बनाना आसान था, लेकिन अब सिलेंडर भरवाना जेब पर भारी पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा तो हमें फिर से पुराने चूल्हे और लकड़ियों की ओर लौटना पड़ेगा।” सरकार की महत्वाकांक्षी ‘उज्ज्वला योजना’ के तहत जिन गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए थे, उनके सामने अब सबसे बड़ा संकट है। ग्रामीणों का कहना है कि सिलेंडर तो मिल गया, लेकिन अब उसे दोबारा भरवाने के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो रहा है। कई गांवों में लोग फिर से उपले (कंडे) और लकड़ियों का इस्तेमाल करने को मजबूर हो गए हैं, जिससे धुएं के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। गैस की कीमतों का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। ढाबों, होटलों और जलपान गृहों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। चाय और नाश्ते के दामों में वृद्धि होने के कारण ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद वे अचानक दाम नहीं बढ़ा सकते, जिससे उनका मुनाफा कम हो गया है। उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाई जाए और रसोई गैस पर दी जाने वाली सब्सिडी को फिर से प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।




