जी भारत न्यूज24
रिपोर्ट: देवेश प्रताप सिंह राठौर
स्थान: झांसी, उत्तर प्रदेश
मुख्य बिंदु: पीड़िता ‘क्रांति’ को स्वस्थ होने तक मुफ्त इलाज दिलाने के निर्देश, लापरवाही बरतने वाले हॉस्पिटल पर कड़ा रुख।
झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में जिलाधिकारी (DM) गौरांग राठी की महत्वाकांक्षी पहल ‘जनसंवाद’ रंग लाने लगी है। आज जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से एक संवेदनशील मामले की सुनवाई की। उन्होंने तहसील सदर और थाना नवाबाद क्षेत्र की पिछले 6 महीनों से अधिक समय से लंबित पड़ी एक गंभीर शिकायत का मौके पर ही निस्तारण कराया। प्रशासन के इस त्वरित और मानवीय फैसले से शिकायतकर्ता के चेहरे पर खुशी लौट आई है।
क्या था पूरा मामला?
तहसील सदर के झोपड़पट्टी पुरा (झांसी) निवासी लंबू आदिवासी (पुत्र श्री चन्ना) ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी भाभी क्रांति देवी के गलत इलाज और अस्पताल की लापरवाही को लेकर प्रार्थना पत्र दिया था।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित महिला के पेट में पथरी बताकर उन्हें ‘न्यू टाटा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर’ (बायपास रोड, झांसी) में भर्ती कराया गया था। आरोप था कि चिकित्सकों ने ₹2 लाख लेकर मरीज के पेट के दो ऑपरेशन किए, लेकिन आराम मिलने की बजाय महिला की स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई।
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस संबंध में 1 नवंबर 2025 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय की जांच समिति के समक्ष बयान भी दर्ज कराए गए थे, लेकिन लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी और मरीज की हालत लगातार खराब हो रही थी।
VC के जरिए आमने-सामने संवाद, खुली अस्पताल की पोल
जिलाधिकारी गौरांग राठी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे संवाद किया। इस वीसी में मण्डलीय प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, सीएमओ, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO), क्षेत्राधिकारी नगर, तहसीलदार सदर, क्षेत्रीय लेखपाल और शिकायतकर्ता लंबू आदिवासी एक साथ जुड़े।
जांच में खुली लापरवाही: सुनवाई के दौरान सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि गठित समिति की जांच में पाया गया कि हॉस्पिटल में मरीज क्रांति देवी के हार्निया के ऑपरेशन के बाद ‘ए-सेप्टिक प्रिकॉशन’ (संक्रमण से बचाव के उपाय) नहीं अपनाए गए। इस लापरवाही के कारण मरीज के पेट में मवाद (Pus) बन गई थी। अस्पताल प्रबंधन इस घोर लापरवाही से इनकार नहीं कर सकता।
हालाँकि, रुपयों के लेनदेन पर सीएमओ ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता ₹2 लाख देने का कोई लिखित प्रमाण नहीं दे सका, जबकि अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार ₹25,000 प्राप्त होने की बात सामने आई है।
जिलाधिकारी का सख्त निर्देश: ‘स्वस्थ होने तक कराया जाए इलाज’
मामले में अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होने पर जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सीएमओ और एसीएमओ झांसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि:
पीड़ित मरीज क्रांति देवी का जब तक स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक (Safe Level) नहीं हो जाता, तब तक उनके निःशुल्क और समुचित इलाज के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएं।
लापरवाही बरतने वाले अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाए।
अधिकारियों को DM की दो टूक: संवेदनशीलता से करें काम
जनसंवाद के दौरान जिलाधिकारी ने जिले के सभी अधिकारियों को कड़े शब्दों में हिदायत दी। उन्होंने कहा:
“जनसमस्याओं के निस्तारण में जिले के सभी पदाधिकारी पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। यह आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सभी शिकायतों का निवारण निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता को परेशान न होना पड़े।”
उन्होंने आगे कहा कि ‘सेवा-संवाद-समाधान’ कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को मिटाना है, जिससे लोगों का भरोसा सिस्टम पर और मजबूत हो सके।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय जनसंवाद के दौरान जिलाधिकारी के साथ कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) शिव प्रताप शुक्ल, अपर जिलाधिकारी (न्याय) अरुण कुमार गौड़ एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर आकाश रंजन मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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