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बांगरमऊ,उन्नाव।
राजस्व विभाग अब जमीनों की पैमाइश और सीमांकन की पुरानी और पारंपरिक पद्धति को बदलकर आधुनिक रोवर तकनीक (Rover Technology) को अपना रहा है। अत्याधुनिक जीपीएस (GPS) आधारित इस तकनीक के आने से अब खेतों और भूखंडों की नाप न केवल सेंटीमीटर तक सटीक होगी, बल्कि इसमें मानवीय पक्षपात की गुंजाइश भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
जरीब और फीते के युग का अंत, सैटेलाइट से होगी नाप
अब तक गांवों में जमीन की नाप मुख्य रूप से जरीब या फीते से की जाती थी, जिसमें अक्सर त्रुटि होने के कारण मेड़ और रास्तों को लेकर विवाद खड़े हो जाते थे। रोवर मशीन सीधे उपग्रहों (Satellites) से संकेत प्राप्त करती है। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति और क्षेत्रफल का डेटा डिजिटल रूप में दर्ज होता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को तहसील या न्यायालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
** Rover तकनीक के मुख्य फायदे:**
सटीकता: सेंटीमीटर स्तर तक बिल्कुल सही माप।
समय की बचत: घंटों का काम अब मिनटों में संभव।
पारदर्शिता: डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण पक्षपात या गड़बड़ी की आशंका शून्य।
बहुआयामी उपयोग: सरकारी भूमि की पहचान, अवैध कब्जों की जांच और तालाबों के सत्यापन में मददगार।
“रोवर उपकरण सीधे उपग्रहों से संकेत प्राप्त कर जमीन की वास्तविक स्थिति दर्ज करता है। इससे न केवल कार्यप्रणाली में तेजी आएगी, बल्कि भूमि विवादों में भी भारी कमी आएगी।”
— बृजमोहन शुक्ला, उपजिलाधिकारी (SDM), बांगरमऊ




