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उन्नाव। एक तरफ जहां प्रदेश सरकार जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीट रही है वहीं जनपद में पशुपालन विभाग में कदाचार का मामला सामने आया है । जिस पर शासन द्वारा सी वी ओ को निलंबित कर दिया गया वहीं समान दोष वाले दो पशु चिकित्सकों पर कार्यवाही नहीं होना चर्चा का विषय बनी हुई है। बताते चलें कि उन्नाव में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा झाड़ू, तौलिया की खरीद फ़रोख्त, पशु अस्पतालों और सेवा केंद्रों के नवीनीकरण, रंगाई पुताई मामले में 10 गुना से अधिक भुगतान को लेकर शासन से जांच के आदेश किए गए थे कि पूरे मामले की गहनता से जांच कर रिपोर्ट शासन में सबमिट की जाए।
जिस पर उन्नाव डीएम गौरांग राठी द्वारा तीन सदस्य टीम गठित की गई जिसमें गठित टीम ने जांच रिपोर्ट में उन्नाव सी वी ओ महावीर सिंह, चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय कुमार और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर शरद शाक्य को दोषी पाया और अपनी रिपोर्ट में वित्तीय मानकों की दर से अधिक खरीद फ़रोख्त का ब्यौरा दिया गया और पूरी जांच रिपोर्ट उन्नाव डीएम द्वारा शासन को भेजी गई । लेकिन शासन से कार्यवाही एक अधिकारी पर तय की गई । इस जांच रिपोर्ट में दो डॉक्टरों पर कार्यवाही ना होना शासन में बैठे अधिकारियों की मंशा पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। एक रिपोर्ट तीन लोग दोषी पाए गए, कार्यवाही सिर्फ एक पर, ये गले से न उतरने वाली बात है । जबकि सूत्र बताते हैं कि जितने भी खरीद फ़रोख्त पर भुगतान संबंधी कार्य हुए हैं उनका लिखा पड़ी में सीधे तौर पर कोई भी ब्यौरा सामने नहीं आया है । शेष दोनों डॉक्टर पर कार्यवाही का इंतजार है।
सुभाष सिंह ब्यूरो चीफ उन्नाव




