संजीव सिंह चौहान
दबोह । भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है।यह बात कथावाचक परम् पूज्य पंडित रमाकांत महाराज जी ने दबोह क्षेत्र के सुप्रसिद्ध सिद्ध धार्मिक स्थल मां रणकौशला देवी मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही।उन्होंने कहा कि हिरणकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप किया,तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए व कहा कि मांगों जो मांगना है।यह सुनकर हिरनयाक्ष ने अपनी आंखें खोली और ब्रह्माजी को अपने समक्ष खड़ा देखकर कहा-प्रभु मुझे केवल यही वर चाहिए कि मैं न दिन में मरूं,न रात को,न अंदर,न बाहर,न कोई हथियार काट सके,न आग जला सके,न ही मैं पानी में डूबकर मरूं,सदैव जीवित रहूं।उन्होंने उसे वरदान दिया।हिरणकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे।हिरणकश्यप भागवत विष्णु को शत्रु मानते थे।उन्होंने अपने पुत्र को मारने के लिए तलवार उठाया था कि खंभा फट गया उस खंभे में से विष्णु भगवान नरसिंह का रूप धारण करके जिसका मुख शेर का व धड़ मनुष्य का था।प्रगट हुए भगवान नरसिंह अत्याचारी दैत्य हिरनयाक्ष को पकड़ कर उदर चीर कर बध किया।आगे उन्होंने कहा कि कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है।उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है।उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया।उन्होंने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध,लोभ,मोह,हिंसा,संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए।भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है।उन्होंने भगवत कीर्तन करने,ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया।आपको बता दें कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 22 जनवरी 2024 को माँ जगतजननी रणकौशला देवी के जन्मोत्सव के चलते श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन मन्दिर परिसर में किया जा रहा है।जिसमे कथा का रसपान कथाव्यास परम् पूज्य पंडित रमाकांत जी महाराज के द्वारा श्रोताओं को कथा का रसपान कराया जा रहा है।वहीं इस बार पारीक्षत बनने का सौभाग्य तहसीलदार अमित दुबे के माता पिता राधामोहन दुबे-श्रीमती रेखा दुबे को प्राप्त हुआ है।चरण सेवक के रूप में अमित दुबे (तहसीलदार) व उनकी पत्नी दिव्या दुबे (उप पुलिस अधीक्षक) को अवसर मिला है।
भागवत कथा एक ऐसा अमृत है,कि इसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है : रमाकांत महाराज जी




