जी भारत न्यूज24
भिंड (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के भिंड जिले से प्रशासनिक तानाशाही और बदतमीजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सत्ता के नशे में चूर अटेर जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को जब भ्रष्टाचार और जनता के पैसों की लूट पर सवाल पूछा गया, तो वे अपनी नाकामी छुपाने के लिए पत्रकारों से ही बदतमीजी पर उतर आए। कैमरे के सामने कैमरे को देखकर साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का प्रयास किया।
नेवारी पंचायत अमृत सरोवर घोटाला: क्या है पूरा मामला?
दरअसल, भिंड जिले की अटेर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली नेवारी पंचायत में ‘अमृत सरोवर’ योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए की हेराफेरी और महाघोटाले की आशंका है। कागजों पर तो साहब के दावे बड़े-बड़े हैं, लेकिन जब जी भारत न्यूज़ 24 (Zee Bharat News 24) की टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर हकीकत देखी, तो वहां भ्रष्टाचार का खेल साफ नजर आया।
जमीन पर अमृत सरोवर के नाम पर सिर्फ धोखा, बड़े-बड़े गड्ढे और सन्नाटे के अलावा कुछ नहीं मिला। पंचायत द्वारा लगाया गया सरकारी बोर्ड तो वहां मौजूद है, लेकिन पानी और सरोवर का नामोनिशान नहीं है।
सवाल पूछने पर भड़के CEO साहब, कहा- ‘बनिया की दुकान नहीं’
जब इसी महाघोटाले की जमीनी हकीकत और वीडियो फुटेज लेकर जी भारत न्यूज़ 24 के मध्य प्रदेश स्टेट हेड विवेक पांडे ने अटेर जनपद पंचायत के सीईओ से उनके दफ्तर में सीधे सवाल पूछने की कोशिश की, तो साहब आगबबूला हो गए।
सीईओ ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कैमरे के सामने कहा— “यह सरकारी चैंबर है, ऐसा नहीं कि बिना अनुमति के आप… यह बनिया की दुकान नहीं है जो वीडियो बना रहे हो।”
सीईओ साहब को लगता है कि सरकारी दफ्तर उनकी निजी जागीर है, जहां जनता के खून-पसीने की कमाई का हिसाब मांगने पर वे पत्रकारों को रौब दिखाएंगे और डरा देंगे।
वर्जन देने से किया साफ इनकार, आईडी कार्ड पर उठाए सवाल
जब पत्रकारों ने उन्हें नेवारी पंचायत में लगे सरकारी बोर्ड के फुटेज दिखाए और साथ चलकर हकीकत देखने की बात कही, तो सीईओ साहब कैमरे से बचते नजर आए। उन्होंने पत्रकारों के आधिकारिक आईडी कार्ड पर ही सवाल खड़े करना शुरू कर दिए और मामले को भटकाने की कोशिश की।
जब उनसे मामले पर आधिकारिक बयान (वर्जन) मांगा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया— “आपको जो छापना है वो छाप देना, मुझे कोई वर्जन नहीं देना है। जबरदस्ती थोड़ी है, मुझे इंटरव्यू नहीं देना है।” बंद कमरे में बैठकर वे लगातार दावा करते रहे कि उन्होंने खुद जाकर जांच की है और तालाब बना हुआ है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है।
भ्रष्टाचार या मिलीभगत? जी भारत न्यूज़ 24 मांगे जवाब
सीईओ की इस घबराहट और अभद्रता ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
अगर अमृत सरोवर योजना में कोई घोटाला नहीं हुआ है और प्रशासन का दामन साफ है, तो पत्रकारों को देखकर अधिकारी क्यों भड़क गए?
कैमरे के सामने आते ही साहब का व्यवहार तानाशाही में क्यों बदल गया?
क्या सरकारी चैंबर का मतलब यह है कि वहां बैठकर भ्रष्टाचार की फाइलों को छुपाया जाएगा और सच को दबाया जाएगा?
लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और पत्रकार जनता के हक के सवाल ही पूछ रहे थे। जी भारत न्यूज़ 24 इस तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार मुस्तैद है। इस अभद्रता और नेवारी पंचायत के अमृत सरोवर घोटाले के खिलाफ जब तक कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती, हमारी नजर इस खबर पर लगातार बनी रहेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट: विवेक पांडे, स्टेट हेड (मध्य प्रदेश), जी भारत न्यूज़ 24




