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देवेश प्रताप सिंह राठौर, वरिष्ठ पत्रकार
हम बात करते हैं विश्व की विशालतम परिवार भारत की बड़ी कंपनी सहारा इंडिया की सहारा इंडिया आज गर्दिशों में चल रही है, और यह गर्दिशों में क्यों है इसका मुख्य कारण मलिकान ने सहारा इंडिया के कार्यकलापों और अधिकारियों की कार्य शैली पर ध्यान नहीं दिया जिसका पतन का मुख्य कारण बनी, सहारा इंडिया के पतन जिस तरह हो रही है मुझे भी देखकर अच्छा नहीं लग रहा कष्ट हो रहा है, इसलिए मैं लिखनी के माध्यम से उन अधिकारियों को और मालीकान को बताना चाहता हूं, आपकी गैर जिम्मेदारी लापरवाही लाखों लोगों की रोजी रोटी का सहारा छीन गया जिसका कारण एसओआराम की जिंदगी वर्तमान के कारण भविष्य को भूल गए थे, जहां (संस्थान) पर बहन बेटियों की जिस संस्थान में इज्जत नहीं होती थी वहां पर मैंने देखा है महिलाओं के साथ किस तरह से क्या व्यवहार किया जाता रहा, यह मैं लिख नहीं सकता हूं लेकिन देखता था, अनन्य , पावर का दुरुपयोग, ने सहारा इंडिया को बर्बाद कर दिया, बहुत सी चीज ऐसी हैं जो लेखनी के माध्यम से आप तक नहीं लिख सकता लेकिन इतना जरूर कहूंगा जिस संस्थान में अय्याश लोग रहते हैं, उस संस्थान का पतन सुनिश्चित है, किंगफिशर से लेकर सहारा इंडिया परिवार और बहुत से उदाहरण है हमारे पास, एक कहावत कही गई है जैसी करनी वैसी भरनी लेकिन सहारा इंडिया की मलिकान जो थे उन्होंने छोटे कर्मचारियों के प्रति कभी ध्यान नहीं दिया और उनके साथ जो डायरेक्टर लेवल एवं वरिष्ठ अधिकारी लोग उनके करीब रहते थे वह भी निष्पक्षता के साथ कर्मचारियों की बात मालिकान तक नहीं पहुंचते थे और उनकी तानाशाही चलती थी जो चाहते थे मलिकन से लिखवा कर कर्मचारियों का उत्पीड़न करते और कराते रहते थे, एक कहावत कही गई है चोर चोर मौसेरे भाई सब एक दूसरे से बंधे थे, गलत कामों में तो कोई किसी को दवा नहीं पता था डायरेक्टर मालिकान पर हावी रहते थे, क्योंकि उनके पास मालिकान के सारे अच्छे बुरे कार्यकलापों का लेखा-जोखा रहता था। मैं जो लिख रहा हूं, मैं बहुत ही गरीब और छोटा व्यक्ति हूं मेरी हैसियत इतने बड़े लोगों के खिलाफ लिखने की नहीं परंतु सत्य सत्य होता है उसे लिखना चाहिए जो हमें हिम्मत इसलिए आई है, क्योंकि मैने अपनी आंखों से देखा है, अन्याय और अय्याशी, परन्तु मां दुर्गे कृपा के कारण मुझे सत्य लिखने की हिम्मत प्राप्त होती है, क्योंकि मैने अन्याय को देखा है, अन्याय और अय्याशी क्या और कैशी होती है, यह इस संस्थान का मुख अंग बन चुका था। और एक बात और आपको बताऊंगा मैं जब उस संस्थान में काम करता था मेरे साथ अन्याय हुआ मैंने अन्याय के प्रति हाईकोर्ट में लेबर कोर्ट के डिसीजन को हाई कोर्ट में रिट दायर की उस रिट में मुझे विजय मिली मुझे, आज भी गूगल में सर्च करके सहारा इंडिया बनाम मुझे देखा जा सकता है, हाई कोर्ट के डिसीजन को देख सकते हैं, सहारा इंडिया के लीगल के प्रमुख थे उन्होंने मुझे बुलाया और बात करने का तरीका गुंडागर्दी का कहा आप नौकरी और सहारा के विरुद्ध कार्रवाई एक साथ रहकर नहीं कर सकते, मैंने उनसे कहा सर अन्याय और अपने हक के लिए जब आप अपने पद का दुरुपयोग करके किसी की जिंदगी को बर्बाद करते हैं, तब एक कोर्ट का ही सहारा बनता है मैंने वही किया और जो लीगल हेड है, वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है वह भी बहुत छोटे कर्मचारियों से चमचागिरी से और बहुत से साधन को मालिकान तक पहुंचाते रहे जिस प्रकार सहारा इंडिया में ऊंचे पद पर बैठे लगभग सभी लोग इसी विचार धारा के थे (जो उस विचार धारा के नहीं थे वे रिजाइन कर नौकरी छोड़ कर चले गए हैं),उसमें से एक लीगल हेड भी है, और लीगल सहारा इंडिया के हेड अवकाश प्राप्त जज और बहुत से बुद्धिजीवी व्यक्ति सहारा में मोटी रकम लेकर काम करते रहे और अपना समय काटते रहे अच्छी सुविधाओं के अनुसार, और लीगल हेड है सिर्फ उसके पास डिग्री है चमचागिरी की और किसी तरह उन्होंने एलएलबी करली होगी, इस तरह के लोग सहारा इंडिया में अधिक थे जो मालिकान की सुख सुविधाओं का विशेष ध्यान रखते थे, जिससे उन्हें दिन-रात चौगुनी तरक्की मिलती जाती थी। जिस संस्थान में महिलाओं के प्रति सम्मान नहीं होता, जिस संस्थान में कर्मचारियों के प्रति सदव्यवहार नहीं होता, मालिकान के पास अपने कर्मचारियों के प्रति सीधी समीक्षा नहीं होती, जब मालकिन अपने छोटे कर्मचारियों के बीच में आकस्मिक हाल-चाल जानने के लिए उनके समक्ष उपस्थित और अपने अधिकारियों का उनके प्रति क्या व्यवहार है, जानिए मालिकान कभी नहीं पहुंचते, जब मलिकान उनके किए हुए गलत कार्यों में सहयोग का भागी बन जाता है, जब मालिकान छोटे कर्मचारियों से दूरी बना लेता है, जब मालिकान अपने आसपास ऐसे लोगों को डायरेक्टर अधिकारी बनकर साथ रखता है जो कर्मचारी की हित की रक्षा नहीं कर सकते, जब मालिकान कर्मचारियों के दुख सुख को मालिक तक सही तरीके से नहीं पहुंचता है। मालीकान को दिए गए प्रार्थना पत्र उनके आसपास चलने वाले अधिकारी डायरेक्टर को प्राप्त होने पर उन पत्रों को मालीकान के समक्ष न रखकर स्वयं अपना व्यक्तिगत डिसीजन देकर संस्था के कर्मचारियों के साथ अहित करता हो, और इस बात की खबर मलिकान तक ना हो और हो , खबर हो भी उस पर कार्रवाई न करें उनके गलत कार्यों में सहयोग का भाग होने के कारण और यह अन्याय निरंतर चलता रहता हो तो उस संस्थान का पतन सुनिश्चित है।




