गोपाल बसेडिया
मुनि शुकदेव के जन्म की कथा सुनकर भक्ति मय हुए श्रोतागण
गोहद। नगर का प्रसिद्ध कालिका माता बसारा मंदिर पर आज शुक्रवार से श्रीमद् भागवत कथा आयोजन शुरू हुआ। श्रीमद् भागवत कथा का भजन राजा भैया के द्वारा कराया जा रहा है। जिसमें आज कथा व्यास आचार्य पं. संतोष शास्त्री वृंदावन धाम के मुखारविंद से भागवत कथा का शुभारंभ हुआ पहले दिन कथा व्यास आचार्य ने पौराणिक कथाओं के संबंध में विस्तार से बताया और उन्होंने सर्वप्रथम शुकदेव मुनि वेदव्याजी की कथा सुनाई जिसके अंतर्गत शुकदेव मुनि के वेदव्याजी पुत्र थे। शुकदेव जी ने ही राजा परीक्षित को भागवत व देवताओं को महाभारत कथा सुनाई थी. मान्यता के अनुसार ये 12 वर्ष तक माता के गर्भ में छिपे रहे। हिंदू धर्म में श्रीमद् भागवत पढऩे व सुनने का विशेष महत्व है. पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रृंगी ऋषि ने जब राजा परीक्षित को सात दिन में मृत्यु का श्राप दिया। तब शुकदेव मुनि ने मुक्ति के लिए उन्हें ये पुराण सुनाया था। पिता ऋषि वेदव्यास से ज्ञान पाकर देवताओं को महाभारत की कथा भी मुनि शुकदेव ने ही सुनाई थी। बहुत कम लोग ही ये जानते हैं कि मुनि शुकदेव एक शुक यानि तोता थे। जो भगवान शंकर के डर से 12 वर्ष तक मां के गर्भ में रहे थे। श्रीमद् भागवत कथा के अंत में कथा व्यास पंडित संतोष शास्त्री जी के द्वारा श्रद्धालुओं को ज्ञानवर्धक एवं विभिन्न प्रकार की समस्याओं से कैसे निजात पाई जाए इसके संबंध में भक्त गणों को बताया। भागवत कथा सुनाने आए सभी भक्तगणों अंत में कालका माता की प्रशादी ग्रहण की। आज की कथा का अनंद हजारों हज़ारों भक्त गणों ने ग्रहण किया।




