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संस्कृति विभाग के सहयोग से उदय सांस्कृतिक संस्थान ने आयोजित किया नाट्य उत्सव; रंगकर्मियों की जीवंत प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा
उन्नाव। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से उदय सांस्कृतिक संस्थान, उन्नाव द्वारा एक भव्य नाट्य मंचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिरसिंहपुर स्थित शिव शंकर सिंह-शिवराम सिंह महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध साहित्यकार नसीर अहमद “नसीर” की मर्मस्पर्शी कहानियों को रंगमंच पर जीवंत किया गया। अलग-अलग विधाओं और सामाजिक परिवेश पर आधारित इन कहानियों के सफल मंचन को दर्शकों ने खूब सराहा और करतल ध्वनि से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
मंच पर बिखरे रंगमंच के विविध रंग, कलाकारों ने फूंकी जान
नाट्य उत्सव में प्रख्यात रंगकर्मियों ने अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता का परिचय दिया। रंगकर्मी जब्बार अकरम, रहमान रूमी, जया उपाध्याय, शफी अहमद खान, रफीक अहमद, राघवेंद्र सिंह और विकेश वाजपेई ने अलग-अलग कहानियों का ऐसा सजीव मंचन किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
फिल्म और नाट्य विधा के वरिष्ठ जानकार श्री दिनेश प्रियमन ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा:
“फिल्म और सामान्य नाट्य कला की तुलना में किसी कहानी का मंचन करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। इसमें एक ही कलाकार को मंच पर एक साथ कई पात्रों को अपने अभिनय से जीवंत करना पड़ता है, जो आज के कलाकारों ने बखूबी कर दिखाया।”
“गांव-गांव पहुंचे रंगमंच तो होगा असली उत्थान” : सुरेंद्र वर्मा ‘बाबा जी’
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पधारे भारतीय सर्व धर्म संसद के प्रदेश अध्यक्ष एवं श्री साईं दरबार मंदिर सेवा समिति के संस्थापक श्री सुरेंद्र वर्मा “बाबा जी” ने कलाकारों की पीठ थपथपाई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अगर रंगमंच को केवल शहरों तक सीमित न रखकर गांव-गांव तक ले जाया जाए, तभी वास्तविक रूप में रंगमंच का उत्थान होगा। उन्होंने इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रंगकर्मी जब्बार अकरम के प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की।
वहीं, मूल कहानीकार श्री नसीर अहमद “नसीर” ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि कहानियां कहीं बाहर से नहीं आतीं, बल्कि हमारे और आपके आस-पास के सामाजिक परिवेश से ही निकलकर आती हैं। रंगमंच के बहाने हमें समाज के उसी ताने-बाने को गहराई से जानने और समझने का अवसर मिलता है।
पर्दे के पीछे की टीम और सहयोग
इस सफल नाट्य प्रस्तुति को भव्य बनाने में बैकस्टेज टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
रूप सज्जा (Make-up): अस्मिता उपाध्याय
मंच सज्जा (Set Design): मो. आजम अकरम एवं अभिषेक वर्मा
मंच संचालन (Anchoring): बलराम सिंह “निर्बल”
ध्वनि एवं प्रकाश (Sound & Lights): शकील खान
कार्यक्रम के सफल समापन पर उदय सांस्कृतिक संस्थान द्वारा महाविद्यालय के प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ का इस सराहनीय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान क्षेत्र के तमाम साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
ब्यूरो रिपोर्ट: ज़ी भारत न्यूज़ 24 (उन्नाव)




