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लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अपराधियों पर लगाम कसने के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे ‘हाफ एनकाउंटर’ (पैर में गोली मारना) की नीति पर अब सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ विचारक देवेश प्रताप सिंह राठौर ने सरकार की इस कार्यप्रणाली पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा है कि अपराधियों को केवल घायल करना भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
घायल शेर होता है ज्यादा घातक
देवेश प्रताप सिंह ने एक पुरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि हमारे बुजुर्गों ने हमेशा सिखाया है कि “घायल शेर बहुत ही घातक होता है।” ठीक इसी तरह, मुठभेड़ में घायल होकर जेल जाने वाले अपराधी भविष्य में और भी अधिक हिंसक हो सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भविष्य में कभी सत्ता परिवर्तन होता है, तो यही ‘हाफ एनकाउंटर’ वाले अपराधी समाज और प्रशासन के लिए गहरी चोट और बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।
प्रशासनिक समय और धन की बर्बादी
राठौर ने तर्क दिया कि हाफ एनकाउंटर के बाद प्रशासन और शासन का पूरा ध्यान अपराधी के इलाज, परवरिश और देखभाल में लग जाता है। सरकारी अस्पतालों में पुलिस का पहरा और इलाज पर होने वाला भारी खर्च जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों की संख्या में इस तरह से निरंतर वृद्धि हो रही है, जो प्रदेश की सुरक्षा के लिए उचित नहीं है।
सरकार से सीधी मांग: फुल एनकाउंटर की हो व्यवस्था
सरकार से विशेष निवेदन करते हुए देवेश प्रताप सिंह ने कहा:
“गंभीर अपराधों में संलिप्त और ईनामी अपराधियों पर किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतनी चाहिए। प्रदेश को गुंडा-मवाली मुक्त बनाने और कानून का राज स्थापित करने के लिए ‘हाफ’ नहीं बल्कि ‘फुल एनकाउंटर’ की व्यवस्था होनी चाहिए।”
उनका मानना है कि जब तक अपराधियों के मन में खत्म होने का डर नहीं होगा, तब तक नए अपराधी पैदा होते रहेंगे। प्रदेश को पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए सरकार को इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि आने वाले भविष्य में अपराधियों की कोई गुंजाइश न रहे।
रिपोर्ट: ब्यूरो डेस्क




