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तेहरान/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में गहराते सैन्य संकट और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा दावा किया है। ईरानी मीडिया की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने संभावित युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए 10 लाख से अधिक ग्राउंड सैनिकों (जमीनी सेना) को लामबंद (Mobilize) कर लिया है।
ईरान का कहना है कि उसे खुफिया जानकारी मिली है कि अमेरिका उस पर कभी भी जमीनी हमला कर सकता है। इसी खतरे को देखते हुए देश भर के युवाओं में सेना में शामिल होने का अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।
मुख्य बिंदु: युद्ध की तैयारी या सुरक्षा कवच?
10 लाख सैनिकों का दावा: ईरान ने अपनी नियमित सेना और अर्धसैनिक बलों को हाई अलर्ट पर रखते हुए 10 लाख से ज्यादा जवानों की तैनाती का लक्ष्य रखा है।
अमेरिकी हमले का डर: रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को आशंका है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर सीधा हमला कर सकता है।
युवाओं का सेना की ओर झुकाव: पिछले कुछ दिनों में बसीज (Basij), रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और नियमित ईरानी सेना में भर्ती होने के लिए आवेदनों की बाढ़ आ गई है।
देशभक्ति की लहर या मजबूरी?
ईरानी मीडिया के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा स्वेच्छा से सैन्य केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। युवाओं का कहना है कि वे किसी भी विदेशी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बसीज’ जैसे अर्धसैनिक संगठनों में वॉलंटियर्स की बढ़ती संख्या ईरान की ‘असिमेट्रिकल वॉरफेयर’ (Asymmetrical Warfare) रणनीति का हिस्सा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता खतरा
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का माहौल है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत होती है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। फिलहाल, दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
संपादकीय टिप्पणी: क्या यह केवल एक मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) है या वाकई दुनिया एक और बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ी है?
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