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देश। हम बात करते हैं पूरे उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे भारतवर्ष की फिलहाल तो हम बुंदेलखंड की बात करते हैं, मेरा सभी से कहना है कि खोया की बनी हुई मिठाइयां ना लें, आप सुनते होंगे कि त्योहारों के समय नकली मावा, खाया कितना बरामद होता है, और उसका सेंपल भी लिया जाता है आज तक सैंपल का रिजल्ट किसी को पता चला है नहीं चला है। सिर्फ यह पता चल जाता है कि यह नकली मावा था खोया था जिसको प्रशासन ने छापा डाल के पकड़ा लेकिन मैंने अपनी आंखों से देखा है, जब किसी दुकान का खाद्य सामग्री का सैंपल लिया जाता है उसके बाद क्या चलता है सुविधा शुल्क वह मिलने के बाद उसे दुकान को सील की हुई दुकान को ओपन कर दिया जाता है, और जांच रिपोर्ट क्या आई मैंने तो यहां तक देखा है लखनऊ की एक बहुत बड़ी दुकान मिठाई की छापा पड़ा था तीन-चार साल पहले जहां के लड्डू बहुत फेमस थे वहां पर किस तरह की गंदगी निकली थी तथा किस तरह कि मिठाइयां पाई गई थी, वही मिठाई जब काउंटर में लग जाती है तब आपका मन खाने को करने लगता है लेकिन बंटी किस तरह है देख लेंगे और कितना नकली सामान पड़ता है यह सब बहुत ही दशा खराब है भाई,उसके बाद क्या हुआ ले देकर दुकान खोल दी गई। मिलावट का काम कभी बंद नहीं होगा शासन और प्रशासन सिर्फ कार्रवाई करता है। अपनी आय बढ़ाने के लिए और कहीं ना कहीं उनके लोग लगे रहते हैं उसके माध्यम से सुविधा शुल्क लेकर सब रफा दफा कर दिया जाता है,मुझे बताइए आज तक किसी का सैंपल लिया गया है उसका रिजल्ट ओपन हुआ है नहीं हुआ है जांच रिपोर्ट आएगी कभी जांच रिपोर्ट नहीं आती है। अगर आती होगी तो आप इसमें ठंडा वस्ते में रख दी जाती है। मेरे संज्ञान में यह कभी नहीं आया है रिपोर्ट का रिजल्ट, क्योंकि मोटी रकम प्राप्त हो जाती है मेरा ऐसा मानना है, और जो सच्चाई भी है। मेरा सभी से कहना है मिठाई कोई भी किसी दुकान से ना लें अधिकतर बचे हो सके तो घर में ही बनवा ले और नहीं बनवा सकते हैं बेसन की अन्य प्रकार की मिठाईयां ले।
अब हम बात करते हैं पुरी दुकानों की खाने से संबंधित आप नहीं जानते हैं, समोसे बनते हैं तेल के ऊपर तेल के ऊपर तेल के ऊपर डालते रहते हैं वह जहर बन जाता है। कितना खतरनाक समोसा होता है लोग खाते हैं ले जाते परिवार के लिए। परिवार को बच्चों को खिलाते हैं और उसमें इस्तेमाल किया गया तेल पाम तेल होता है। बिल्कुल थर्ड क्लास का तेल इस्तेमाल करते हैं, क्या शासन प्रशासन नहीं जानता है क्या कभी किसी दुकान का उन्होंने जांच की है, जब कभी एक आध दुकान को चिन्हित करके व्यवस्था पूर्ण रूप से छापा डाल देते हैं और वहां पर कमी मिलती है,उसका सैंपल ले लेते हैं बाद में ले दे कर मामला सब शांत हो जाता है,क्या इसको कोई नहीं जानता है सभी जानते हैं आज सरकार को सबसे पहले सोचना चाहिए खाद्य सामग्री जो दुकानों में होटल में बन रही है, वह शुद्ध नहीं है वहां का सामान शुद्ध नहीं है जो तेल इस्तेमाल किया जाता है वह बहुत ही थर्ड क्लास का है,तथा मिठाइयां या स्नेक्स बनते जहां पर बड़ी-बड़ी दुकान हैं। आप तेल देख लीजिए तेल समझ में नहीं आता है जैसे लगता है डीजल जैसा तेल का रंग बन जाता है,इतना काला तेल हो जाता है और लोग बड़े चाव से खाते हैं, क्योंकि खुशबू अच्छी लगती कर जाते हैं, और मजबूर में वह लोग खाकर और अपनी तकलीफ बढ़ाते हैं, तथा कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं, इस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए हर दुकान का सर्वे होना चाहिए हर दुकान के तेल का जांच होना चाहिए समय समय पर आकस्मिक छापे के द्वारा खाद सामग्री की जांच होनी चाहिए अगर स्वच्छता चाहते हैं देश और प्रदेश और जिले में तो इन दुकानों पर एक मापदंड रखना चाहिए कि आप इस तेल का इस्तेमाल करेंगे और दूसरे दिन इस तेल का इस्तेमाल नहीं करेंगे ऐसा कुछ नियम बनाया जाए तो मुझे लगता है, कुछ ठीक होगा नहीं इसी तरह चलता रहेगा जांच एक बहाना है कमाई का जरिया बना है। सिर्फ त्योहारों में ही क्यों जांच करते हैं क्या त्योहारों के बीच में मिठाई नहीं बनती हैं आपको मैं बताना चाहता हूं बहुत भ्रष्टाचारी है सुधार होना संभव नहीं क्योंकि जिला प्रशासन स्वयं इस पर संज्ञान नहीं लेता है, क्योंकि उन्हें तो सब प्रकार की शुद्ध चीज प्राप्त हो रही हैं देश जिला प्रदेश गंदा खाए या मिलावट उससे उनका कोई मतलब नहीं सरकार निर्देश दे देती है तो छापी डाल देते हैं,एक दो को पड़कर खाना पूरी करके और फिर प्रक्रिया वही भ्रष्टाचारियों की शुरू हो जाती है।
देवेश प्रताप सिंह राठौर, ब्यूरो चीफ उत्तर प्रदेश




