जी भारत न्यूज24
भिण्ड। क्षेत्र में भ्रष्टाचार, जालसाजी और रसूखदारों के काले कारनामों के खिलाफ हमेशा बेबाक और निडर आवाज उठाने वाले अग्रणी समाचार पोर्टल ‘जी भारत न्यूज 24’ को डराने की एक और नाकाम कोशिश औंधे मुंह गिर चुकी है। 4 जून 2026 को प्रसारित अस्पताल आवंटन एग्रीमेंट से जुड़ी धोखाधड़ी की खबर से बौखलाए राजेश कुमार सोनी ने अपने एडवोकेट मयंक सोनी (ग्वालियर हाई कोर्ट) के माध्यम से संस्थान को एक लीगल नोटिस भेजकर खबर हटाने और माफी मांगने का अनैतिक दबाव बनाने का प्रयास किया था।

लेकिन रसूखदारों को शायद यह अंदाजा नहीं था कि उनका पाला एक ऐसे संस्थान से पड़ा है जिसके पास ईमानदारी का हौसला और कानून के अकाट्य दस्तावेज दोनों मौजूद हैं।
झूठे लीगल नोटिस में मढ़े गए थे अनर्गल आरोप
राजेश कुमार सोनी द्वारा भेजे गए नोटिस में ‘जी भारत न्यूज 24’ पर एकतरफा खबर चलाने, ₹5,00000 के कथित झूठे लेनदेन का आरोप लगाने और बिना वैध RNI रजिस्ट्रेशन के काम करने जैसे पूरी तरह से मनगढ़ंत और अनर्गल आरोप मढ़े गए थे। इतना ही नहीं, रसूख के नशे में चूर होकर 48 घंटे के भीतर खबर न हटाने पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), NBDSA और पुलिस प्रशासन में शिकायत दर्ज कराने की खोखली धमकियां भी दी गई थीं।
‘जी भारत न्यूज 24’ का वो कानूनी प्रहार, जिससे उड़े सामने वाले पक्ष के होश
झूठे नोटिस के दबाव के आगे घुटने टेकने के बजाय, संस्थान के प्रबंध निदेशक व मुख्य संपादक गोपाल बंसेड़िया ने वो कड़ा और बिंदुवार विधिक प्रत्युत्तर (Reply) भेजा है, जिसने सामने वाले पक्ष की बोलती बंद कर दी है।
संस्थान ने अपने आधिकारिक कानूनी जवाब में दो टूक साफ कर दिया है:
खबर 100% प्रामाणिक है: सरकारी सील युक्त पुलिस पावती और अकाट्य प्रशासनिक दस्तावेज इस बात के जीवित गवाह हैं कि हमारी खबर पूरी तरह सत्य, अकाट्य और जनहित में थी।
दबाव बनाने की घटिया साजिश: यह लीगल नोटिस केवल पीड़ितों को डराने, मुख्य कानूनी मुद्दे से ध्यान भटकाने और स्वतंत्र मीडिया की आवाज को दबाने के दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से भेजा गया एक हथकंडा मात्र है।
वैधता पर सवाल उठाने वालों को करारा जवाब: चैनल पूरी तरह से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) की गाइडलाइंस, नए IT Rule 21 और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत पूरी तरह वैध रूप से संचालित है।
अंतिम अल्टीमेटम: अब सीधे मानहानि का मुकदमा और जेल की तैयारी!
‘जी भारत न्यूज 24’ ने रसूखदारों को आखिरी चेतावनी जारी करते हुए साफ कह दिया है कि इस निराधार मामले को तत्काल यहीं समाप्त किया जाए। यदि इसके बाद भी संस्थान की छवि को रत्ती भर भी धूमिल करने की कुचेष्टा की गई, या न्यायालय को गुमराह करने वाला कोई भी असत्य वाद दायर किया गया, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें:
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के तहत झूठी शिकायत दर्ज कराने, साजिश रचने और आपराधिक भय कारित करने का केस दर्ज कराया जाएगा।
रसूखदारों के खिलाफ दीवानी व आपराधिक मानहानि (Civil and Criminal Defamation) का तगड़ा मुकदमा ठोका जाएगा।
इस पूरी कानूनी लड़ाई में होने वाले समस्त हर्जाने, अदालती खर्चे और विधिक परिणामों की संपूर्ण जिम्मेदारी नोटिस भेजने वाले मुवक्किल की खुद की होगी।
“सरकारी सील युक्त दस्तावेज और सच्चाई हमारी ताकत हैं। ‘जी भारत न्यूज 24’ निष्पक्षता और निडरता के सिद्धांतों पर चलता है। हम जनता के हक के लिए लड़ते हैं और रसूखदारों की ऐसी गीदड़भभकियों के आगे रत्ती भर भी झुकने का सवाल ही पैदा नहीं होता।”
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https://zeebharatnews24.com/demand-for-fir-against-rajesh-soni-who-committed-fraud-worth-lakhs-in-the-name-of-opening-a-hospital-and-entered-into-an-agreement-by-pretending-to-be-a-building-owner/
गोपाल बसेड़िया, प्रधान संपादक




