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भिण्ड | 28 अप्रैल, 2026 ब्यूरो रिपोर्ट: जिला संवाददाता
भिण्ड (मध्य प्रदेश)। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा स्वैच्छिक संगठनों के सशक्तिकरण के लिए संचालित ‘पंख’ कार्यक्रम की जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर भिण्ड की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में जिले के विकास में स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) की भूमिका और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।
सामाजिक संगठनों के बिना विकास अधूरा: कलेक्टर
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य केवल शासकीय विभाग अकेले नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “समग्र विकास में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। सामाजिक समस्याओं का हल समाज के भीतर से ही निकलता है और जनभागीदारी के माध्यम से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।” कलेक्टर ने उपस्थित संस्थाओं को पर्यावरण संरक्षण, जैविक व प्राकृतिक खेती, नशा मुक्ति अभियान, लोककला संवर्धन, और गौशाला प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नवाचार करने और समाज में जागरूकता लाने का गुर सिखाया।
गर्मी और ‘हीट वेव’ से बचाव हेतु कैलेंडर जारी
बैठक के दौरान बढ़ती गर्मी को देखते हुए ‘लू (हीट वेव) बचाव कैलेंडर’ जारी किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने तापघात से बचने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए:
प्रमुख लक्षण: अत्यधिक प्यास, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी और बेहोशी।
बचाव के उपाय: दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। ढीले सूती कपड़े पहनें और सिर ढककर रखें।
खान-पान: पर्याप्त पानी, ओआरएस (ORS), नींबू पानी और छाछ का नियमित सेवन करें।
आपातकालीन स्थिति: लू लगने पर व्यक्ति को ठंडी जगह लिटाएं और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
इन विभागों की रही गरिमामयी उपस्थिति
बैठक में जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी सहित कृषि, उद्यानिकी, आयुष और सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक ने ‘पंख’ योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसके बाद विभिन्न नवांकुर संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों का विवरण साझा किया।
क्या है ‘पंख’ कार्यक्रम?
यह मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद की एक पहल है जिसका उद्देश्य जिले के स्वैच्छिक संगठनों को सशक्त बनाना, उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि करना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके माध्यम से विभिन्न सामाजिक संस्थाएं एक मंच पर आकर जिला प्रशासन के साथ मिलकर बेहतर समन्वय से कार्य कर सकेंगी।




